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Atharvaveda - Mantra 21

Atharvaveda 12/1/21

5 Sukta
63 Mantra
12/1/21
Devata- भूमिः Rishi- अथर्वा Chhanda- एकावसाना साम्नी त्रिष्टुप् Suktam- भूमि सूक्त
Mantra with Swara
अ॒ग्निवा॑साः पृथि॒व्यसित॒ज्ञूस्त्विषी॑मन्तं॒ संशि॑तं मा कृणोतु ॥

अ॒ग्निऽवा॑सा: । पृ॒थि॒वी । अ॒सि॒त॒ऽज्ञू: । त्विषि॑ऽमन्तम् । सम्ऽशि॑तम् । मा॒ । कृ॒णो॒तु॒ ॥१.२१॥

Mantra without Swara
अग्निवासाः पृथिव्यसितज्ञूस्त्विषीमन्तं संशितं मा कृणोतु ॥

अग्निऽवासा: । पृथिवी । असितऽज्ञू: । त्विषिऽमन्तम् । सम्ऽशितम् । मा । कृणोतु ॥१.२१॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (पृथिवी) = यह भूमि (अग्निवासा:) = अग्निरूप वस्त्र को धारण किये हुए है तथा इसमें अग्नि का वास है-पृथिवी के अन्दर भी अग्नि तत्त्व है और बाहर भी। (असित-ज्ञुः) = यह 'अग्निवासा: पृथिवी' उस अबद्ध, [अ सक्त] प्रभु का ज्ञान दे रही है। इसपर उत्पन्न एक-एक पत्र-पुष्प उस प्रभु की महिमा का प्रतिपादन कर रहा है। २. यह पृथिवी (मा) = मुझे (त्विषीमन्तम्) = ज्ञान की दीप्ति वाला व (संशितम्) = तेजस्वी (कृणोतु) = करे। इसका एक-एक पदार्थ मेरी उत्सुकता को बढ़ाता हुआ मेरी ज्ञानवृद्धि का कारण बने और इसके पदार्थ मुझसे ठीक उपयुक्त हुए-हुए मुझे तेजस्वी बनाएँ।
Essence
यह अग्निवासा पृथिवी मुझे भी ज्ञानाग्नि व तेजस्विता की अनिवाला बनाए।
Subject
असित-ज्ञुः