Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 17

Atharvaveda 12/1/17

5 Sukta
63 Mantra
12/1/17
Devata- भूमिः Rishi- अथर्वा Chhanda- त्र्यवसाना पञ्चपदा शक्वरी Suktam- भूमि सूक्त
Mantra with Swara
वि॑श्व॒स्वं मा॒तर॒मोष॑धीनां ध्रु॒वां भूमिं॑ पृथि॒वीं धर्म॑णा धृ॒ताम्। शि॒वां स्यो॒नामनु॑ चरेम वि॒श्वहा॑ ॥

वि॒श्व॒ऽस्व᳡म् । मा॒तर॑म् । ओष॑धीनाम् । ध्रु॒वाम् । भूमि॑म् । पृ॒थि॒वीम् । धर्म॑णा । धृ॒ताम् । शि॒वाम् । स्यो॒नाम् । अनु॑ । च॒रे॒म॒ । वि॒श्वहा॑ ॥१.१७॥

Mantra without Swara
विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम्। शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा ॥

विश्वऽस्वम् । मातरम् । ओषधीनाम् । ध्रुवाम् । भूमिम् । पृथिवीम् । धर्मणा । धृताम् । शिवाम् । स्योनाम् । अनु । चरेम । विश्वहा ॥१.१७॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. (विश्वस्वम्) = [सः] सम्पूर्ण धनों को उत्पन्न करनेवाली, (ओषधीनां मातरम्) = ओषधियों को मातृभूत (ध्रुवाम्) = मर्यादा में स्थित, (पृथिवीम्) = अतिशयेन विस्तारवाली (भूमिम्) = इस भूमि पर (विश्वहा) = सदा (अनुचरेम्) = अनुकूलता से विचरण करें। यह पृथिवी इतनी विशाल है कि यहाँ परस्पर संघर्ष की आवश्यकता ही नहीं। २. इस पृथिवी पर हम विचरण करें जोकि (धर्मणा धृताम्) = धर्म से धारण की गई है, अर्थात् जब तक यहाँ रहनेवाले मनुष्य धर्म का पालन करते हैं तब तक यह पृथिवी भी सबका धारण करती हुई सुन्दर बनती है। (शिवाम्) = यह कल्याणकारिणी है और (स्योनाम्) = सुख-दा है। अध्यात्म दृष्टिकोण से व भौतिक दृष्टिकोण से दोनों ही दृष्टिकोणों से यह हमारा शुभ करती है।
Essence
यह पृथिवी सब धनों को उत्पन्न करती है, ओषधियों को जन्म देती है। यह हमारे लिए मातृवत् कल्याणकारिणी है। धर्म के द्वारा इसका धारण होता है [धर्मों धारयते प्रजाः]।
Subject
'विश्व-सू' पृथिवी