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Atharvaveda - Mantra 9

Atharvaveda 11/8/9

10 Sukta
34 Mantra
11/8/9
Devata- अध्यात्मम्, मन्युः Rishi- कौरुपथिः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- अध्यात्म सूक्त
Mantra with Swara
इन्द्रा॒दिन्द्रः॒ सोमा॒त्सोमो॑ अ॒ग्नेर॒ग्निर॑जायत। त्वष्टा॑ ह जज्ञे॒ त्वष्टु॑र्धा॒तुर्धा॒ताजा॑यत ॥

इन्द्रा॑त् । इन्द्र॑: । सोमा॑त् । सोम॑: । अ॒ग्ने: । अ॒ग्नि: । अ॒जा॒य॒त॒ । त्वष्टा॑ । ह॒ । ज॒ज्ञे॒ । त्वष्टु॑: । धा॒तु: । धा॒ता । अ॒जा॒य॒त॒ ॥१०.९॥

Mantra without Swara
इन्द्रादिन्द्रः सोमात्सोमो अग्नेरग्निरजायत। त्वष्टा ह जज्ञे त्वष्टुर्धातुर्धाताजायत ॥

इन्द्रात् । इन्द्र: । सोमात् । सोम: । अग्ने: । अग्नि: । अजायत । त्वष्टा । ह । जज्ञे । त्वष्टु: । धातु: । धाता । अजायत ॥१०.९॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (इन्द्र) = इन्द्र [मेष व विद्युत्] (कुतः अजायत) = किससे प्रादुर्भूत हुआ? (सोमः) = [पू प्रेरणे] यह प्रेरक वायु (कुतः) = कहाँ से उत्पन्न हो गई? (अग्निः कुत्त:) = [अजायत] अग्नि कहाँ से उत्पन्न हो गई। (त्वष्टा) = सब जीवों के शरीर का निर्माण करनेवाला पृथिवीतत्त्व (कुतः) = कहाँ से (समभवत्) = हुआ, धाता धारण करनेवाला वह सूर्य (कुतः अजायत) = कहाँ से हो गया? २. (इन्द्रात्) = पूर्वकल्प में जिस रूप में इन्द्र था उस इन्द्र से (इन्द्रः) = इदानीन्तन इन्द्र (अजायत) = प्रादुर्भूत हुआ। इसी प्रकार (सोमात् सोम:) = पूर्वकल्प के सोम से, यह इस कल्प का सोम हुआ। (अग्नेः अग्नि:) = पूर्वकल्प के अग्नितत्त्व ने इस कल्प का अग्नितत्त्व हुआ। (ह) = निश्चय से (त्वष्टु:) = पूर्वकल्प के पृथिवी तत्त्व से (त्वष्टा जज्ञे) = यह (त्वष्टा) = पृथिवी तत्त्व प्रादुर्भूत हुआ। (धातुः) = धाता (अजायत) = पूर्वकल्प के धाता से इस कल्प का धाता हो गया।
Essence
जैसे पूर्वकल्प में सृष्टि की रचना हुई थी ठीक उसी प्रकार इस कल्प में भी सृष्टि-रचना हुई। [पूर्व-पूर्वसृष्टयनुसारेणैव इदानीन्तना अपि इन्द्रादयो देवाः सृष्टाः । सूर्याचन्द्रमसौ धाता यथापूर्वमकल्पयत्-सा०]
Subject
इन्द्र-से-इन्द्र, सोम-से-सोम