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Atharvaveda - Mantra 21

Atharvaveda 11/7/21

10 Sukta
27 Mantra
11/7/21
Devata- उच्छिष्टः, अध्यात्मम् Rishi- अथर्वा Chhanda- स्वराडनुष्टुप् Suktam- उच्छिष्ट ब्रह्म सूक्त
Mantra with Swara
शर्क॑राः॒ सिक॑ता॒ अश्मा॑न॒ ओष॑धयो वी॒रुध॒स्तृणा॑। अ॒भ्राणि॑ वि॒द्युतो॑ व॒र्षमुच्छि॑ष्टे॒ संश्रि॑ता श्रि॒ता ॥

शर्क॑रा: । सिक॑ता: । अश्मा॑न: । ओष॑धय: । वी॒रुध॑: । तृणा॑ । अ॒भ्राणि॑ । वि॒ऽद्युत॑: । व॒र्षम् । उत्ऽशि॑ष्टे । सम्ऽश्रि॑ता । श्रि॒ता ॥९.२१।

Mantra without Swara
शर्कराः सिकता अश्मान ओषधयो वीरुधस्तृणा। अभ्राणि विद्युतो वर्षमुच्छिष्टे संश्रिता श्रिता ॥

शर्करा: । सिकता: । अश्मान: । ओषधय: । वीरुध: । तृणा । अभ्राणि । विऽद्युत: । वर्षम् । उत्ऽशिष्टे । सम्ऽश्रिता । श्रिता ॥९.२१।

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Meaning
१. (शर्करा:) = क्षुद्र पाषाणविशेष [बजरी], (सिकता:) = बालुका [रेत], (अश्मान:) = पत्थर, (ओषधयः) = व्रीहि-यव आदि ओषधियाँ, (वीरुधः) = लताएँ, (तृणा:) = गौ आदि से उपभोग्य घास, (अभ्राणि) = मेघ, (विद्युत:) = बिजली, (वर्षम्) = वृष्टि-ये सब (उच्छिष्टे) = उच्छिष्यमाण प्रभु में (संश्रिता) = समवस्थित हुए-हुए श्रिता-प्रभु के आश्रय में रह रहे हैं।
Essence
'शर्करा, सिकता, पाषाण' आदि सब पदार्थों के आधार प्रभु ही हैं। । सूचना-'संश्रिता' का अर्थ अन्य 'स्वाश्रय समवेत पदार्थ' भी लिया जा सकता है। ये सब भी उस उच्छिष्ट में श्रिता-आश्रित हैं।
Subject
शर्करा: सिकताः