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Atharvaveda - Mantra 9

Atharvaveda 11/6/9

10 Sukta
23 Mantra
11/6/9
Devata- चन्द्रमा अथवा मन्त्रोक्ताः Rishi- शन्तातिः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- पापमोचन सूक्त
Mantra with Swara
भ॑वाश॒र्वावि॒दं ब्रू॑मो रु॒द्रं प॑शु॒पति॑श्च॒ यः। इषू॒र्या ए॑षां संवि॒द्म ता नः॑ सन्तु॒ सदा॑ शि॒वाः ॥

भ॒वा॒श॒र्वौ । इ॒दम् । ब्रू॒म॒: । रु॒द्रम् । प॒शु॒ऽपति॑: । च॒ । य: । इषू॑: । या: । ए॒षा॒म् । स॒म्ऽवि॒द्म । ता: । न॒: । स॒न्तु॒ । सदा॑ । शि॒वा: ॥८.९॥

Mantra without Swara
भवाशर्वाविदं ब्रूमो रुद्रं पशुपतिश्च यः। इषूर्या एषां संविद्म ता नः सन्तु सदा शिवाः ॥

भवाशर्वौ । इदम् । ब्रूम: । रुद्रम् । पशुऽपति: । च । य: । इषू: । या: । एषाम् । सम्ऽविद्म । ता: । न: । सन्तु । सदा । शिवा: ॥८.९॥

Meaning
१. (भवाशर्वौ) = भव और शर्व को-सुखों के उत्पादक व दुःखों के विनाशक [१] प्रभु को-लक्ष्य करके हम (इदम्) = इस स्तुतिवचन को (ब्रूमः) = कहते हैं। (रुद्रम्) = दुष्टों को रुलानेवाले, (च) = और (यः पशुपति:) = जो सब प्राणियों के रक्षक प्रभु हैं, उन्हें लक्ष्य करके हम इस स्तुतिवचन को कहते हैं। २. (एषाम्) = इन 'भव, शर्व, रुद्र व पशुपति' की (याः इषः संविद्य) = जिन प्रेरणाओं को हम जानते हैं, (ता:) = वे सब प्रेरणाएँ (न:) = हमारे लिए (सदा) = सदा (शिवाः सन्तु) = कल्याणकारिणी हों।
Essence
'भव' का स्मरण करते हुए हम भी सुखों का उत्पादन करनेवाले हों, 'शर्व' का स्मरण हमें दु:खदलन में प्रवृत्त करे । 'रुद्र' का स्मरण करते हुए हम दुष्टता का दलन करें और प्राणियों का रक्षण करते हुए हम 'पशुपति' के समान बनें। यही शिवमार्ग है।
Subject
'भवशर्व, रुद्र, पशुपति'

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