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Atharvaveda - Mantra 21

Atharvaveda 11/6/21

10 Sukta
23 Mantra
11/6/21
Devata- चन्द्रमा अथवा मन्त्रोक्ताः Rishi- शन्तातिः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- पापमोचन सूक्त
Mantra with Swara
भू॒तं ब्रू॑मो भूत॒पतिं॑ भू॒ताना॑मु॒त यो व॒शी। भू॒तानि॒ सर्वा॑ सं॒गत्य॒ ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः ॥

भू॒तम् । ब्रू॒म॒: । भू॒त॒ऽपति॑म् । भू॒ताना॑म् । उ॒त । य: । व॒शी । भू॒तानि॑ । सर्वा॑ । स॒म्ऽगत्य॑ । ते । न॒: । मु॒ञ्च॒न्तु॒ । अंह॑स: ॥८.२१॥

Mantra without Swara
भूतं ब्रूमो भूतपतिं भूतानामुत यो वशी। भूतानि सर्वा संगत्य ते नो मुञ्चन्त्वंहसः ॥

भूतम् । ब्रूम: । भूतऽपतिम् । भूतानाम् । उत । य: । वशी । भूतानि । सर्वा । सम्ऽगत्य । ते । न: । मुञ्चन्तु । अंहस: ॥८.२१॥

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Meaning
१. (भूतम्) = लब्धसत्ताक [उत्पन्न] वस्तुमात्र को लक्ष्य करके हम (ब्रूम:) = स्तुतिवचन-उनके गुणों के प्रतिपादक वचनों को कहते हैं। (भूतपतिम्) = सब भूतों के रक्षक, (उत) = और (यः भूतानां वशी) = जो सब भूतों को वश में करनेवाला देव है, उसके स्तुतिवचनों को कहते हैं। (ते) = वे (सर्वा भूतानि) = सब भूत (संगत्य) = परस्पर संगत होकर, (न) = हमें (अंहसः मुञ्चन्तु) = पाप व कष्ट से मुक्त करें।
Essence
हम भूतों [उत्पन्न पदार्थों] के गुणों को समझें। भूतपति प्रभु का स्मरण करें। इसप्रकार भूतपति के स्मरण के साथ भूतों का ठीक प्रयोग करते हुए कष्टों से बचें।
Subject
भूत-भूतपति