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Atharvaveda - Mantra 20

Atharvaveda 11/5/20

10 Sukta
26 Mantra
11/5/20
Devata- ब्रह्मचारी Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- ब्रह्मचर्य सूक्त
Mantra with Swara
ओष॑धयो भूतभ॒व्यम॑होरा॒त्रे वन॒स्पतिः॑। सं॑वत्स॒रः स॒हर्तुभि॒स्ते जा॒ता ब्र॑ह्मचा॒रिणः॑ ॥

ओष॑धय: । भू॒त॒ऽभ॒व्यम् । अ॒हो॒रा॒त्रे इति॑ । वन॒स्पति॑: । स॒म्ऽव॒त्स॒र: । स॒ह । ऋ॒तुऽभि॑: । ते । जा॒ता: । ब्र॒ह्म॒ऽचा॒रिण॑: ॥७.२०॥

Mantra without Swara
ओषधयो भूतभव्यमहोरात्रे वनस्पतिः। संवत्सरः सहर्तुभिस्ते जाता ब्रह्मचारिणः ॥

ओषधय: । भूतऽभव्यम् । अहोरात्रे इति । वनस्पति: । सम्ऽवत्सर: । सह । ऋतुऽभि: । ते । जाता: । ब्रह्मऽचारिण: ॥७.२०॥

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Meaning
१. (ओषधयः) = फलपाकान्त व्रीहि-यव आदि, (भूतभव्यम्) = उत्पन्न और उत्पत्स्यमान चराचरात्मक जगत् (अहोरात्रे) = दिन और रात, (वनस्पति:) = शरीरों में प्रकाश की रक्षक [वनाना पालयिता-वन Light] वनस्पतियाँ, (संवत्सर:) = द्वादश मासात्मक काल (अत्तभिः सह) = वसन्तादि छह ऋतुओं के साथ, ये सब (ब्रह्मचारिणः जाता:) = ब्रह्मचारी के तप की महिमा से ठीक प्रादुर्भाववाले हुए।
Essence
जिस राष्ट्र में ब्रह्मचर्य का पालन होता है, वहाँ ओषधियों, वनस्पतियों ठीक समय पर प्रादुर्भूत होती हैं। वहाँ ऋतुओं के साथ कालचक्र भी सुचारुरूपेण चलता है।
Subject
'ओषधियों व काल' का ब्रह्मचर्य