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Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 11/5/1

10 Sukta
26 Mantra
11/5/1
Devata- ब्रह्मचारी Rishi- ब्रह्मा Chhanda- पुरोऽतिजागतविराड्गर्भा त्रिष्टुप् Suktam- ब्रह्मचर्य सूक्त
Mantra with Swara
ब्रह्मचा॒रीष्णंश्च॑रति॒ रोद॑सी उ॒भे तस्मि॑न्दे॒वाः संम॑नसो भवन्ति। स दा॑धार पृथि॒वीं दिवं॑ च॒ स आ॑चा॒र्यं तप॑सा पिपर्ति ॥

ब्र॒ह्म॒ऽचा॒री । इ॒ष्णन् । च॒र॒ति॒ । रोद॑सी॒ इति॑ । उ॒भे इति॑ । तस्मि॑न् । दे॒वा: । सम्ऽम॑नस: । भ॒व॒न्ति॒ । स: । दा॒धा॒र॒ । पृ॒थि॒वीम् । दिव॑म् । च॒ । स: । आ॒ऽचा॒र्य᳡म् । तप॑सा । पि॒प॒र्ति॒ ॥७.१॥

Mantra without Swara
ब्रह्मचारीष्णंश्चरति रोदसी उभे तस्मिन्देवाः संमनसो भवन्ति। स दाधार पृथिवीं दिवं च स आचार्यं तपसा पिपर्ति ॥

ब्रह्मऽचारी । इष्णन् । चरति । रोदसी इति । उभे इति । तस्मिन् । देवा: । सम्ऽमनस: । भवन्ति । स: । दाधार । पृथिवीम् । दिवम् । च । स: । आऽचार्यम् । तपसा । पिपर्ति ॥७.१॥

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Meaning
१. (ब्रह्मचारी) = [ब्रह्मणि वेदात्मके चरितुं शीलं यस्य] वेदात्मक ब्रह्म में विचरण करनेवाला विद्यार्थी (उभे) = दोनों (रोदसी) = द्यावापृथिवी को-मस्तिष्क व शरीर को-(इष्णन्) = उन्नत [Promote] करता हुआ-तेज से व्यास करता हुआ, अर्थात् वीर्यरक्षण द्वारा शरीर ब मस्तिष्क को तेजस्वी व दीप्त बनाता हुआ (चरति) = गतिवाला होता है। (तस्मिन्) = उस ब्रहाचारी में (देवा:) = सब इन्द्रियों [वाणी आदि के रूप में शरीर में रहनेवाले अग्नि आदि देव] (संमनसः) = समान मनवाले, अर्थात् अनुग्रहबुद्धिवाले (भवन्ति) = होते हैं। अथवा सब (देवा:) = ज्ञानी उपाध्याय वर्ग उसपर अनुग्रह बुद्धियुक्त होते हैं। २. (सः) = वह ब्रह्मचारी (पृथिवीम्) = शरीररूप पृथिवी को (च दिवम्) = तथा मस्तिष्करूप धुलोक को दाधार धारण करता है। (स:) = वह ब्रह्मचारी (तपसा) = तप के द्वारा-'ऋत, सत्य, शान्त-स्वभाव, मन व इन्द्रियों के दमन तथा श्रुत [शास्त्र-श्रवण] के द्वारा-(आचार्यम्) = अपने आचार्य को (पिपर्ति) = पालित करता है-आचार्य की पूर्णता करता है। आचार्य ज्ञान देता है यह ब्रह्मचारी तप के द्वारा उस ज्ञान का ग्रहण करता हुआ आचार्य के अभीष्ट कर्म की पूर्ति करता है।
Essence
ब्रह्मचारी वीर्यरक्षण द्वारा शरीर व मस्तिष्क को उमत बनाता है। अपनी सब इन्द्रियों व मन को प्रशस्त करता है। शरीर व मस्तिष्क का धारण करता हुआ तपस्या द्वारा आचार्य-प्रदत्त ज्ञान का ग्रहण करता हुआ आचार्य को पालित करता है।
Subject
ब्रह्मचारी का आचार्य-पालन