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Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 11/4/1

10 Sukta
26 Mantra
11/4/1
Devata- प्राणः Rishi- भार्गवो वैदर्भिः Chhanda- शङ्कुमत्यनुष्टुप् Suktam- प्राण सूक्त
Mantra with Swara
प्रा॒णाय॒ नमो॒ यस्य॒ सर्व॑मि॒दं वशे॑। यो भू॒तः सर्व॑स्येश्व॒रो यस्मि॒न्त्सर्वं॒ प्रति॑ष्ठितम् ॥

प्रा॒णाय॑ । नम॑: । यस्य॑ । सर्व॑म् । इ॒दम् । वशे॑ । य: । भू॒त: । सर्व॑स्य । ई॒श्व॒र: । यस्मि॑न् । सर्व॑म् । प्रति॑ऽस्थितम् ॥६.१॥

Mantra without Swara
प्राणाय नमो यस्य सर्वमिदं वशे। यो भूतः सर्वस्येश्वरो यस्मिन्त्सर्वं प्रतिष्ठितम् ॥

प्राणाय । नम: । यस्य । सर्वम् । इदम् । वशे । य: । भूत: । सर्वस्य । ईश्वर: । यस्मिन् । सर्वम् । प्रतिऽस्थितम् ॥६.१॥

Meaning
१. उस (प्राणाय) = ['सर्वप्नाणिशरीरं व्याप्य चेष्टते-हिरण्यगर्भ:'-सा०] सबके प्राणभूत प्रभु के लिए (नमः) = नमस्कार हो, (यस्य) = जिस प्राणप्रभु के (इदं सर्व वशे) = यह सम्पूर्ण चराचरात्मक जगत् वश में है, (य:) = जो प्राणों का प्राण प्रभु (भूत:) = [सर्वदा लब्धसत्ताकः, भूतकालावच्छिनः, न तु भविष्यन] सदा से हैं-'वे कभी होंगे' ऐसा उनके लिए नहीं कहा जाता। (सर्वस्य ईश्वरः) = सब प्राणिजात के ईश हैं-कर्मानुसार विविध योनियों में प्राप्त करानेवाले हैं। (यस्मिन्) = जिस प्राणात्मा प्रभु में (सर्व प्रतिष्ठितम्) = सम्पूर्ण जगत् प्रतिष्ठित है-"जो सर्वाधार हैं' उन प्रभु के लिए हम प्रणाम करते हैं।
Essence
हम प्राणात्मा प्रभु को प्रणाम करते हैं। उन्हीं के वश में यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड है। वे प्रभु सदा से हैं, सबके ईश्वर हैं, सबको प्रतिष्ठा [आधार] हैं।
Subject
प्राणात्मा प्रभु को प्रणाम

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