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Atharvaveda - Mantra 31

Atharvaveda 11/1/31

10 Sukta
37 Mantra
11/1/31
Devata- ब्रह्मौदनः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- भुरिक्त्रिष्टुप् Suktam- ब्रह्मौदन सूक्त
Mantra with Swara
ब॒भ्रेर॑ध्वर्यो॒ मुख॑मे॒तद्वि मृ॒ड्ढ्याज्या॑य लो॒कं कृ॑णुहि प्रवि॒द्वान्। घृ॒तेन॒ गात्रानु॒ सर्वा॒ वि मृ॑ड्ढि कृ॒ण्वे पन्थां॑ पि॒तृषु॒ यः स्व॒र्गः ॥

ब॒भ्रे: । अ॒ध्व॒र्यो॒ इति॑ । मुख॑म् । ए॒तत् । वि । मृ॒ड्ढि॒ ।आज्या॑य । लो॒कम् । कृ॒णु॒हि॒ । प्र॒ऽवि॒द्वान् । घृ॒तेन॑ । गात्रा॑ । अनु॑ । सर्वा॑ । वि । मृ॒ड्ढि॒ । कृ॒ण्वे । पन्था॑म् । पि॒तृषु॑ । य: । स्व॒:ऽग: ॥१.३१॥

Mantra without Swara
बभ्रेरध्वर्यो मुखमेतद्वि मृड्ढ्याज्याय लोकं कृणुहि प्रविद्वान्। घृतेन गात्रानु सर्वा वि मृड्ढि कृण्वे पन्थां पितृषु यः स्वर्गः ॥

बभ्रे: । अध्वर्यो इति । मुखम् । एतत् । वि । मृड्ढि ।आज्याय । लोकम् । कृणुहि । प्रऽविद्वान् । घृतेन । गात्रा । अनु । सर्वा । वि । मृड्ढि । कृण्वे । पन्थाम् । पितृषु । य: । स्व:ऽग: ॥१.३१॥

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Meaning
१. हे (अध्वर्यो) = यज्ञशील पुरुष! (बभ्रे) = धारण करनेवाले (एतत्) = इस ब्रह्मौदन के (मुखं विमृड्ढि) = द्वार को-प्रमुख साधन को-शुद्ध कर डाल। मन ही इस ब्रह्मौदन का 'मुख' है, इस मन को तू शुद्ध करनेवाला बन, (प्रविद्वान्) = ज्ञानी होता हुआ तू (आज्याय) = [अज् to shine. to be beautiful] जीवन को दीस व सुन्दर बनाने के लिए (लोकं कृणुहि) = प्रकाश का सम्पादन कर। जितना ही अन्तःप्रकाश प्राप्त होगा, उतना ही जीवन दीप्त व सुन्दर बनेगा। २. अब (घृतेन) = मलों के क्षरण व ज्ञानदीति के द्वारा सर्वा गात्रा (अनुविमृति) = सब अंग-प्रत्यंगों को शुद्ध कर डाल। इसप्रकार जीवन को शुद्ध मन के द्वारा ज्ञान से पूरित करके, अन्त:प्रकाश के द्वारा जीवन को सुन्दर बनाकर तथा मलक्षरण द्वारा सब अङ्गों को नीरोग व सशक्त बनाकर मैं (पितृषु) = रक्षणात्मक कार्यों में प्रवृत्त लोगो में (पन्थां कृण्वे) = मार्ग बनाता हूँ। मैं भी रक्षणात्मक कार्यों में प्रवृत्त होता है। इसप्रकार मैं उस स्थिति का निर्माण करता हँर (यः स्वर्ग:) = जो प्रकाश व सुख को प्राप्त करानेवाली है।
Essence
स्वर्ग की स्थिति को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि हम [क] ज्ञान-प्राप्ति के साधनभूत मन को शुद्ध बनाएँ, [ख] जीवन को अलंकृत करने के लिए अन्त:प्रकाश प्राप्त करें, [ग] मल-क्षरण द्वारा सब अङ्गों को शुद्ध बना दें, [घ] रक्षणात्मक कार्यों को करनेवाले पितरों के मार्ग पर चलें।
Subject
मनःशुद्धि + शरीर-शुद्धि