Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 26

Atharvaveda 11/1/26

10 Sukta
37 Mantra
11/1/26
Devata- ब्रह्मौदनः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- विराड्जगती Suktam- ब्रह्मौदन सूक्त
Mantra with Swara
सोम॑ राजन्त्सं॒ज्ञान॒मा व॑पैभ्यः॒ सुब्रा॑ह्मणा यत॒मे त्वो॑प॒सीदा॑न्। ऋषी॑नार्षे॒यांस्तप॒सोऽधि॑ जा॒तान्ब्र॑ह्मौद॒ने सु॒हवा॑ जोहवीमि ॥

सोम॑ । रा॒ज॒न् । स॒म्ऽज्ञान॑म् । आ । व॒प॒ । ए॒भ्य॒: । सुऽब्रा॒ह्म॒णा: । य॒त॒मे । त्वा॒ । उ॒प॒ऽसीदा॑न् । ऋषी॑न् ।आ॒र्षे॒यान् । तप॑स: । अधि॑ । जा॒तान् । ब्र॒ह्म॒ऽओ॒द॒ने । सु॒ऽहवा॑ । जो॒ह॒वी॒मि॒ ॥१.२६॥

Mantra without Swara
सोम राजन्त्संज्ञानमा वपैभ्यः सुब्राह्मणा यतमे त्वोपसीदान्। ऋषीनार्षेयांस्तपसोऽधि जातान्ब्रह्मौदने सुहवा जोहवीमि ॥

सोम । राजन् । सम्ऽज्ञानम् । आ । वप । एभ्य: । सुऽब्राह्मणा: । यतमे । त्वा । उपऽसीदान् । ऋषीन् ।आर्षेयान् । तपस: । अधि । जातान् । ब्रह्मऽओदने । सुऽहवा । जोहवीमि ॥१.२६॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. हे (राजन् सोम) = शरीर में सुरक्षित होने पर शरीर की शक्तियों को दीप्त करनेवाले सोम [वीर्य]! (एभ्यः) = इन सबके लिए, (यतमे) = जितने (सुब्राह्मणा:) = उत्तम ब्रह्म के उपासक लोग (त्वा उपसीदान्) = तेरी उपासना करें, अर्थात् तुझे शरीर में सुरक्षित रखने के लिए यन करें, उन सबके लिए (संज्ञानम्) = सम्यक् ज्ञान को (आवप) = [निधेहि-सा०] प्राप्त करा। सोमरक्षण के द्वारा ज्ञानाग्नि को दीप्त करके हम संज्ञानवाले बनें। २. एक गृहपली संकल्प करती है मैं (सुहवा) = शोभन आह्वानवाली होती हुई ब्रह्मौदने ज्ञान के भोजन के निमित्त (तपसः अधिजातान्) = तप के द्वारा विकसित ज्ञानवाले (आर्षेयान्) = सदा [ऋषौ भवान्] ज्ञान में निवास करनेवाले (ऋषीन्) = [ऋष् to kill] वासना को विनष्ट करनेवाले इन लोगों को (जोहवीमि) = पुकारती हूँ। इनका आतिथ्य करती हुई इनसे ज्ञान की प्रेरणाओं को प्राप्त करती हैं।
Essence
हम शरीर में सोम का रक्षण तथा घर में ज्ञानी ब्राह्मणों का आतिथ्य करते हुए ज्ञान प्राप्त करें।
Subject
सोमरक्षण तथा ज्ञानी ब्राह्मणों का आतिथ्य