Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 19

Atharvaveda 10/6/19

10 Sukta
35 Mantra
10/6/19
Devata- फालमणिः, वनस्पतिः Rishi- बृहस्पतिः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- मणि बन्धन सूक्त
Mantra with Swara
अ॑न्तर्दे॒शा अ॑बध्नत प्र॒दिश॒स्तम॑बध्नत। प्र॒जाप॑तिसृष्टो म॒णिर्द्वि॑ष॒तो मेऽध॑राँ अकः ॥

अ॒न्त॒:ऽदे॒शा: । अ॒ब॒ध्न॒त॒ । प्र॒ऽदिश॑: । तम् । अ॒ब॒ध्न॒त॒ । प्र॒जाप॑तिऽसृष्ट: । म॒णि: । द्वि॒ष॒त: । मे॒ । अध॑रान् । अ॒क॒: ॥६.१९॥

Mantra without Swara
अन्तर्देशा अबध्नत प्रदिशस्तमबध्नत। प्रजापतिसृष्टो मणिर्द्विषतो मेऽधराँ अकः ॥

अन्त:ऽदेशा: । अबध्नत । प्रऽदिश: । तम् । अबध्नत । प्रजापतिऽसृष्ट: । मणि: । द्विषत: । मे । अधरान् । अक: ॥६.१९॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. (अन्तर्देशा:) = [अन्तः देशो येषाम्] अन्दर ही जिनका देश है-जो अन्तर्मुखी वृत्तिवाले हैं, वे इस वीर्यमणि को (अबध्नत) = शरीर में बाँधते हैं। (प्रदिश:) = [प्रकृष्टा दिक येषाम्] हदयस्थ प्रभु के प्रकृष्ट निर्देशों [प्रेरणाओं] को सुननेवाले लोग (तम् अबध्नत) = उस वीर्यमणि को अपने में बाँधते हैं। २. (प्रजापतिसृष्ट:) = प्रजाओं के रक्षक प्रभु से उत्पन्न की गई यह (मणि:) = वीर्यमणि मे मेरे (द्विषतः) = अप्रीतिकर रोगरूप शत्रुओं को (अधरान् अक:) = पादाक्रान्त करती है-पाँव तले रौंद देती है।
Essence
हम अन्तर्मुखी वृत्तिवाले बनें-अन्त:स्थित प्रभु की प्रेरणा को सुनें। इसप्रकार वीर्यमणि को अपने अन्दर बद्ध करते हुए रोगों को कुचल देनेवाले बनें।
Subject
अन्तर्देशा:-प्रदिशः