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Atharvaveda - Mantra 14

Atharvaveda 10/4/14

10 Sukta
26 Mantra
10/4/14
Devata- तक्षकः Rishi- गरुत्मान् Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- सर्पविषदूरीकरण सूक्त
Mantra with Swara
कै॑राति॒का कु॑मारि॒का स॒का खन॑ति भेष॒जम्। हि॑र॒ण्ययी॑भि॒रभ्रि॑भिर्गिरी॒णामुप॒ सानु॑षु ॥

कै॒रा॒ति॒का । कु॒मा॒रि॒का । स॒का । ख॒न॒ति॒ । भे॒ष॒जम् । हि॒र॒ण्ययी॑भि: । अभ्रि॑ऽभि: । गि॒री॒णाम् । उप॑ । सानु॑षु ॥४.१४॥

Mantra without Swara
कैरातिका कुमारिका सका खनति भेषजम्। हिरण्ययीभिरभ्रिभिर्गिरीणामुप सानुषु ॥

कैरातिका । कुमारिका । सका । खनति । भेषजम् । हिरण्ययीभि: । अभ्रिऽभि: । गिरीणाम् । उप । सानुषु ॥४.१४॥

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Meaning
१. 'किरात' शब्द 'कु विक्षेपे तथा अत सातत्यगमने' धातुओं से बनकर निरन्तर विक्षिप्त गतिबाले का वाचक है। 'कुमार' शब्द 'कुमार क्रीडायाम्' से बनकर 'खेलते रहनेवाले' का वाचक है। इन दोनों हानिकर वृत्तियों को दूर करने का उपाय ज्ञान प्राप्त करना है। आचार्यों के समीप रहकर उनकी ज्ञानदान की क्रियाओं में ही इन वृत्तियों को दूर करने का औषध विद्यमान है, अत: कहा है कि (कैरातिका) = निरन्तर विक्षित गतिवाली (कुमारिका) = विषयों में क्रीडा को मनोवृत्तिवाली (सका) = वह कुत्सित आचरणवाली युवति (गिरीणाम्) = ज्ञान की वाणियों का उपदेश देनेवाले गुरुओं की (सानुषु) = [षणु दाने सनोति] ज्ञानदान की क्रियाओं में (भेषजम्) = अशुभ वृत्तियों के निराकरण की औषध को (हिरण्ययीभिः अभिभिः) = [अभ्र गती] ज्योतिर्मय गतियों के द्वारा (उपखनति) = समीपता से खोदती है। ज्ञान ही औषध है, उसे यह प्राप्त करती है। इस ज्ञान-औषध को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि ज्ञान-प्राप्ति के अनुकूल क्रियाओंवाली हो। यही भाव यहाँ 'हिरण्ययीभिः अधिभिः' शब्दों से व्यक्त हुआ है।
Essence
ज्ञानदाता आचार्यों के समीप रहकर ज्ञान-प्राप्ति के लिए अनुकूल गतियोंवाले होते हुए हम ज्ञान प्राप्त करें, इस ज्ञान-औषध द्वारा विक्षिप्त गतियों व विषय-क्रीड़ाओं को समाप्त करनेवाले हों।
Subject
कैरातिका, कुमारिका