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Atharvaveda - Mantra 11

Atharvaveda 10/4/11

10 Sukta
26 Mantra
10/4/11
Devata- तक्षकः Rishi- गरुत्मान् Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- सर्पविषदूरीकरण सूक्त
Mantra with Swara
पै॒द्वस्य॑ मन्महे व॒यं स्थि॒रस्य॑ स्थि॒रधा॑म्नः। इ॒मे प॒श्चा पृदा॑कवः प्र॒दीध्य॑त आसते ॥

पै॒द्वस्य॑ । म॒न्म॒हे॒ । व॒यम् । स्थि॒रस्य॑ । स्थि॒रऽधा॑म्न: । इ॒मे । प॒श्चा । पृदा॑कव: । प्र॒ऽदीध्य॑त: । आ॒स॒ते॒ ॥४.११॥

Mantra without Swara
पैद्वस्य मन्महे वयं स्थिरस्य स्थिरधाम्नः। इमे पश्चा पृदाकवः प्रदीध्यत आसते ॥

पैद्वस्य । मन्महे । वयम् । स्थिरस्य । स्थिरऽधाम्न: । इमे । पश्चा । पृदाकव: । प्रऽदीध्यत: । आसते ॥४.११॥

Meaning
१. (वयम्) = हम (स्थिरस्य) = स्थिरवृत्तिवाले, (स्थिरधाम्न:) = स्थिर तेजवाले. (पैद्वस्य) = गतिशील व्यक्ति का (मन्महे) = मनन करते हैं, इसके जीवन का चिन्तन करते हैं। (इमे) = ये पैट लोग (पृदाकव:) = [पृदाकु] पालन के लिए दान की वृत्तिवाले (प्रदीध्यतः) = [दीधीङ्दीप्तौ] दीस जीवनवाले (पश्चा आसते) = विषय-व्यावृत होकर पीछे ही बैठते हैं। प्रत्याहार' की साधना करते हुए ये लोग विषयों में नहीं फैसते।
Essence
स्थिर, स्थिरधाम्ना, पैद' लोगों का चिन्तन करते हुए हम भी 'गतिशील, स्थिर वृत्तिवाले व स्थिर तेजवाले' बनें। दान की वृत्तिवाले व दीप्त जीवनवाले बनकर हम विषय व्यावृत रहें।
Subject
पृदाकव: प्रदीध्यतः

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