Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 25

Atharvaveda 10/10/25

10 Sukta
34 Mantra
10/10/25
Devata- वशा Rishi- कश्यपः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- वशागौ सूक्त
Mantra with Swara
व॒शा य॒ज्ञं प्रत्य॑गृह्णाद्व॒शा सूर्य॑मधारयत्। व॒शाया॑म॒न्तर॑विशदोद॒नो ब्र॒ह्मणा॑ स॒ह ॥

व॒शा । य॒ज्ञम् । प्रति॑ । अ॒गृ॒ह्णा॒त् । व॒शा । सूर्य॑म् । अ॒धा॒र॒य॒त् । व॒शाया॑म् । अ॒न्त: । अ॒वि॒श॒त् । ओ॒द॒न: । ब्र॒ह्मणा॑ । स॒ह ॥१०.२५॥

Mantra without Swara
वशा यज्ञं प्रत्यगृह्णाद्वशा सूर्यमधारयत्। वशायामन्तरविशदोदनो ब्रह्मणा सह ॥

वशा । यज्ञम् । प्रति । अगृह्णात् । वशा । सूर्यम् । अधारयत् । वशायाम् । अन्त: । अविशत् । ओदन: । ब्रह्मणा । सह ॥१०.२५॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. (वशा) = यह कमनीया वेदधेनु  (यज्ञं प्रत्यगृहात्) = यज्ञ का ग्रहण करती है। जो वशा का ग्रहण करता है, वह यज्ञशील बनता है। (वशा) = यह कमनीया वेदधेनु (सूर्यम् अधारयत्) = हमारे मस्तिष्करूप युलोक में ज्ञानसूर्य का धारण करती है। (वशायाम् अन्त:) = इस वशा के अन्दर (ब्रह्मणा सह) = ज्ञान के साथ (ओदन:) = सुख से क्लिन्न करनेवाला भोजन (अविशत्) = प्रविष्ट हुआ है, अर्थात् यह वशा हमें ब्रह्म-ज्ञान तो प्राप्त कराती ही है, साथ ही हमें भोजन प्राप्त करने के योग्य भी बनाती है।
Essence
यदि हम वेदवाणी को अपनाएँगे तो 'यज्ञशील बनेंगे, ज्ञानसूर्य से दीस जीवनवाले होंगे, सात्त्विक सुखद अन्नों को प्राप्त करेंगे।
Subject
यज्ञ-ज्ञानसूर्य-औदन [सखद भोजन]