Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 14

Atharvaveda 10/10/14

10 Sukta
34 Mantra
10/10/14
Devata- वशा Rishi- कश्यपः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- वशागौ सूक्त
Mantra with Swara
सं हि वाते॒नाग॑त॒ समु॒ सर्वैः॑ पत॒त्रिभिः॑। व॒शा स॑मु॒द्रे प्रानृ॑त्य॒दृचः॒ सामा॑नि॒ बिभ्र॑ती ॥

सम् । हि । वाते॑न । अग॑त । सम् । ऊं॒ इति॑ । सर्वै॑: । प॒त॒त्रिऽभि॑: । व॒शा । स॒मु॒द्रे । प्र । अ॒नृ॒त्य॒त् । ऋच॑: । सामा॑नि । बिभ्र॑ती ॥१०.१४॥

Mantra without Swara
सं हि वातेनागत समु सर्वैः पतत्रिभिः। वशा समुद्रे प्रानृत्यदृचः सामानि बिभ्रती ॥

सम् । हि । वातेन । अगत । सम् । ऊं इति । सर्वै: । पतत्रिऽभि: । वशा । समुद्रे । प्र । अनृत्यत् । ऋच: । सामानि । बिभ्रती ॥१०.१४॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. (ऋचः) = विज्ञानों को तथा (सामानि) = प्रभुस्तोत्रों को (बिभ्रती) = धारण करती हुई यह (वशा) = वेदवाणी (समुद्रे) = प्रसादयुक्त मनवाले पुरुष में (प्रानृत्यत्) = प्रकर्षेण नृत्य करती है, अर्थात् इस "समुद्र' को ही प्राप्त होती है। (हि) = निश्चय से यह (वातेन) = हृदयान्तरिक्ष में [वा गतौ] गति के संकल्पवाले पुरुष के साथ (सम् अगत) = संगत होती है, (उ) = और (सर्वेः पतत्रिभिः सम्) =सब ऊँची उड़ान लेनेवालों के साथ-ऊँचे उद्देश्यवालों के साथ यह संगत होती है।
Essence
वेदज्ञान को प्राप्त करने के लिए हम निर्मल [प्रसन्न] मनवाले हों, हृदय में कर्मसंकल्प से युक्त हों, जीवन में किसी ऊँचे लक्ष्य से प्रेरित होकर चलें।
Subject
सं वातेन