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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 1/7/3

35 Sukta
7 Mantra
1/7/3
Devata- अग्नीन्द्रः Rishi- चातनः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- यातुधाननाशन सूक्त
Mantra with Swara
वि ल॑पन्तु यातु॒धाना॑ अ॒त्त्रिणो॒ ये कि॑मी॒दिनः॑। अथे॒दम॑ग्ने नो ह॒विरिन्द्र॑श्च॒ प्रति॑ हर्यतम् ॥

वि । ल॒प॒न्तु॒ । या॒तु॒धाना॑: । अ॒त्त्रिण॑: । ये । कि॒मी॒दिन॑: ।अथ॑ । इ॒दम् । अ॒ग्ने॒: । न॒: । ह॒वि: । इन्द्र॑: । च॒ । प्रति॑ । ह॒र्य॒त॒म् ॥

Mantra without Swara
वि लपन्तु यातुधाना अत्त्रिणो ये किमीदिनः। अथेदमग्ने नो हविरिन्द्रश्च प्रति हर्यतम् ॥

वि । लपन्तु । यातुधाना: । अत्त्रिण: । ये । किमीदिन: ।अथ । इदम् । अग्ने: । न: । हवि: । इन्द्र: । च । प्रति । हर्यतम् ॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. गतमन्त्र के अनुसार ज्ञानी पुरुषों का प्रचार इसप्रकार से हो कि उससे प्रभावित होकर (ये) = जो (यातुधाना:) = प्रजा में पीड़ा का आधान करनेवाले, (किमीदिन:) = प्रतिक्षण 'क्या खाऊँ' इस राग को आलापनेवाले, (अत्रिण:) = अपने मजे के लिए औरों को खा-जानेवाले [अद् भक्षणे] लोग हैं, वे पश्चात्ताप से युक्त होकर (विलपन्तु) = विलाप करनेवाले हो जाएँ। उन्हें अपने हीन कों का दुःख हो और वे अपने जीवन-सुधार का निश्चय करें। २. इस सुधार कार्य में जनता का सहयोग इस रूप में हो सकता है कि वे इस कार्य के लिए कुछ आहुति दें, अत: वे कहते हैं कि (अथ) = अब हे (अग्रे) = ज्ञान-प्रसारक ब्राह्मण ! आप (च) = और (इन्द्रः) = शासन करनेवाला राजा (इदम्) = इस (न:) = हमारी (हवि:) = आहुति को-कर के रूप में दिये गये धनांश को तथा दान के रूप में दिये गये धन को (प्रतिहर्यतम्) =प्रेमपूर्वक स्वीकार करो। जनता का इस रूप में सहयोग होगा तो यह सुधार-कार्य बड़ी उत्तमता से चलेगा और राष्ट्र का उत्थान हो सकेगा।
Essence
जनता के आर्थिक सहयोग से राजा ज्ञान-प्रसारक ब्राह्मणों द्वारा सुधार-कार्य को उन्नति दे।
Subject
सुधार-कार्य में जनता का सहयोग