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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 1/6/3

35 Sukta
4 Mantra
1/6/3
Devata- अपांनपात् सोम आपश्च देवताः Rishi- सिन्धुद्वीपं कृतिः, अथवा अथर्वा Chhanda- गायत्री Suktam- जल चिकित्सा सूक्त
Mantra with Swara
आपः॑ पृणी॒त भे॑ष॒जं वरू॑थं त॒न्वे॑३ मम॑। ज्योक्च॒ सूर्यं॑ दृ॒शे ॥

आप॑: । पृ॒णी॒त । भे॒ष॒जम् । वरू॑थम् । त॒न्वे । मम॑ । ज्योक् । च॒ । सूर्य॑म् । दृ॒शे ॥

Mantra without Swara
आपः पृणीत भेषजं वरूथं तन्वे३ मम। ज्योक्च सूर्यं दृशे ॥

आप: । पृणीत । भेषजम् । वरूथम् । तन्वे । मम । ज्योक् । च । सूर्यम् । दृशे ॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (आप:) = हे जलो! आप (भेषजम्) = रोग-निवारक गुण को (पृणीत) = अपने में सुरक्षित करो। [प्रणाति to protect, to maintain] | इस रोग-निवारक गुण के द्वारा आप (मम तन्वे) = मेरे शरीर के लिए वरूथम्-[Cover] आच्छादन होओ। आपसे सुरक्षित हुआ मैं किसी रोग का शिकार न होऊँ। २. (च) = और रोगों का शिकार न होता हुआ मैं (ज्योक) = दीर्घकाल तक (सूर्य दृशे) = सूर्य को देखने के लिए होऊँ। सूर्य-दर्शन करता हुआ दीर्घ-जीवन प्राप्त कसैं । जल 'वारि' है, ये रोगों का निवारण करते ही हैं। रोग-निवारण के द्वारा ये जीवन को सुखी बनाते हैं, अत: इनका नाम 'कम्' है।
Essence
रोग-निवारण के गुणवाले ये जल मेरे लिए आच्छादन का काम करें। मैं दीर्घ जीवनवाला बनूं।
Subject
आरोग्य कवच