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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 1/5/3

35 Sukta
4 Mantra
1/5/3
Devata- अपांनपात् सोम आपश्च देवताः Rishi- सिन्धुद्वीपम् Chhanda- गायत्री Suktam- जल चिकित्सा सूक्त
Mantra with Swara
तस्मा॒ अरं॑ गमाम वो॒ यस्य॒ क्षया॑य॒ जिन्व॑थ। आपो॑ ज॒नय॑था च नः ॥

तस्मै॑ । अर॑म् । ग॒मा॒म॒ । व॒: । यस्य॑ । क्षया॑य । जिन्व॑थ । आप॑: । ज॒नय॑थ । च॒ । न॒: ॥

Mantra without Swara
तस्मा अरं गमाम वो यस्य क्षयाय जिन्वथ। आपो जनयथा च नः ॥

तस्मै । अरम् । गमाम । व: । यस्य । क्षयाय । जिन्वथ । आप: । जनयथ । च । न: ॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. हे (आप:) = जलो। हम (वः) = आपके (तस्मै) = उस रस के लिए (अरम्) = पर्याप्तरूप से (गमाम) = प्राप्त हों (यस्य क्षयाय) = जिसके निवास के कारण (जिन्वथ) = आप हमें प्रीणित करते हो। जलों में एक रस है, उसके द्वारा हमारे शरीर की सब शक्तियों का वर्धन होता है। २. (च) = और हे जलो! आप (न:) = हमें (जनयथ) = जनन-शक्ति से युक्त करो। जलों के ठीक प्रयोग से बन्ध्यत्व व नपुंसकत्व का निराकरण होकर हम उत्तम सन्तान को जन्म देनेवाले हों।
Essence
जलों के रस से शरीर की शक्तियों का वर्धन होता है और जनन-शक्ति ठीक होती है।
Subject
जनन-शक्ति