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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 1/5/2

35 Sukta
4 Mantra
1/5/2
Devata- अपांनपात् सोम आपश्च देवताः Rishi- सिन्धुद्वीपम् Chhanda- गायत्री Suktam- जल चिकित्सा सूक्त
Mantra with Swara
यो वः॑ शि॒वत॑मो॒ रस॒स्तस्य॑ भाजयते॒ह नः॑। उ॑श॒तीरि॑व मा॒तरः॑ ॥

य: । व॒: । शि॒वऽत॑म: । रस॑: । तस्य॑ । भा॒ज॒य॒त॒ । इ॒ह । न॒: ।उ॒श॒ती:ऽइ॑व । मा॒तर॑: ॥

Mantra without Swara
यो वः शिवतमो रसस्तस्य भाजयतेह नः। उशतीरिव मातरः ॥

य: । व: । शिवऽतम: । रस: । तस्य । भाजयत । इह । न: ।उशती:ऽइव । मातर: ॥

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1 Bhashyas
Meaning
१.हे जलो! (यः) = जो (वः) = आपका (शिवतमः) = अत्यन्त कल्याण करनेवाला (रसः) = रस है, (न:) = हमें (इह) = इस जीवन में (तस्य) = उसका (भाजयत) = भागी बनाओ। जलों का गुण रस है। यह रस ही उनके सब गुणों का अधिष्ठान है। इस रस को प्राप्त करके मैं उनके सब गुणों को अपनानेवाला बनता हूँ। २. हे जलो! आप मुझे इस गुण को इसप्रकार प्राप्त कराओ (इव) = जैसेकि (उशती: मातरः) = हित की कामनावाली माताएँ अपनी सन्तानों को स्वास्थ्यवर्धक दुग्धरस प्राप्त कराती हैं। वस्तुतः ये दिव्य जल हमारे लिए उतने ही हितकर हैं, जितना कि बच्चों के लिए मातृदुग्ध हितकर है।
Essence
जलों का शिवतम-रस हमें प्रास हो।
Subject
शिवतम-रस