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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 1/28/3

35 Sukta
4 Mantra
1/28/3
Devata- यातुधानी Rishi- चातनः Chhanda- विराट्पथ्याबृहती Suktam- रक्षोघ्न सूक्त
Mantra with Swara
या श॒शाप॒ शप॑नेन॒ याघं मूर॑माद॒धे। या रस॑स्य॒ हर॑णाय जा॒तमा॑रे॒भे तो॒कम॑त्तु॒ सा ॥

या । श॒शाप॑ । शप॑नेन । या । अ॒घम् । मूर॑म् । आ॒ऽद॒धे । या । रस॑स्य । हर॑णाय । जा॒तम् । आ॒ऽरे॒भे । तो॒कम् । अ॒त्तु॒ । सा ॥

Mantra without Swara
या शशाप शपनेन याघं मूरमादधे। या रसस्य हरणाय जातमारेभे तोकमत्तु सा ॥

या । शशाप । शपनेन । या । अघम् । मूरम् । आऽदधे । या । रसस्य । हरणाय । जातम् । आऽरेभे । तोकम् । अत्तु । सा ॥

Meaning
१. [क] (या) = जो (शपनेन) = अपशब्दों, आक्रोशों [curses] से (शशाप) = शाप देती है, गालियाँ देती है, [ख] (या) = जो (मूरम्, अघम्) = [मूरम्-destroying, killing] हिंसात्मक पापों को (आदधे) = धारण करती है, [ग] (या) = जो (रसस्य हरणाय) = औरों के आनन्द को नष्ट करने के लिए (जातम्) = साधन बने हुए कर्म को (आरेभे) = आरम्भ करती है, (सा) = वह (तोकम् अत्तु) = अपनी सन्तान को ही खा जाती है २. इस स्त्री के बच्चों पर इन सब कर्मों का इतना घातक प्रभाव होता है कि बच्चों का जीवन ही नष्ट हो जाता है। उसके बच्चे भी गाली देने लगेंगे, हिंसात्मक कर्मों में रुचिवाले हो जाएंगे और सदा औरों को दु:खी करने में ही आनन्द लेने लगेंगे। इसप्रकार के ये बच्चे बड़े होकर समाज के लिए बड़े भार प्रमाणित होंगे।
Essence
माता अपने सन्तानों के कल्याण के लिए तीन बातों से बचे-[क] गाली देने से, [ख] हिंसात्मक कर्मों से, [ग] औरों के आनन्द को नष्ट करने से। -
Subject
तीन त्याज्य बातें

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