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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 1/27/3

35 Sukta
4 Mantra
1/27/3
Devata- चन्द्रमाः, इन्द्राणी Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- स्वस्त्ययन सूक्त
Mantra with Swara
न ब॒हवः॒ सम॑शक॒न्नार्भ॒का अ॒भि दा॑धृषुः। वे॒णोरद्गा॑ इवा॒भितो ऽस॑मृद्धा अघा॒यवः॑ ॥

न । व॒हव॑: । सम् । अ॒श॒क॒न् । न । अ॒र्भ॒का: । अ॒भि । द॒धृ॒षु॒: । वे॒णो: । अङ्गा॑:ऽइव । अ॒भित॑: । अस॑म्ऽऋध्दा: । अ॒घ॒ऽयव॑: ॥

Mantra without Swara
न बहवः समशकन्नार्भका अभि दाधृषुः। वेणोरद्गा इवाभितो ऽसमृद्धा अघायवः ॥

न । वहव: । सम् । अशकन् । न । अर्भका: । अभि । दधृषु: । वेणो: । अङ्गा:ऽइव । अभित: । असम्ऽऋध्दा: । अघऽयव: ॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. [क] (या) = जो (शपनेन) = अपशब्दों, आक्रोशों [curses] से (शशाप) = शाप देती है, गालियाँ देती है, [ख] (या) = जो (मूरम्, अघम्) = [मूरम्-destroying, killing] हिंसात्मक पापों को (आदधे) = धारण करती है, [ग] (या) = जो (रसस्य हरणाय) = औरों के आनन्द को नष्ट करने के लिए (जातम्) = साधन बने हुए कर्म को (आरेभे) = आरम्भ करती है, (सा) = वह (तोकम् अत्तु) = अपनी सन्तान को ही खा जाती है २. इस स्त्री के बच्चों पर इन सब कर्मों का इतना घातक प्रभाव होता है कि बच्चों का जीवन ही नष्ट हो जाता है। उसके बच्चे भी गाली देने लगेंगे, हिंसात्मक कर्मों में रुचिवाले हो जाएंगे और सदा औरों को दु:खी करने में ही आनन्द लेने लगेंगे। इसप्रकार के ये बच्चे बड़े होकर समाज के लिए बड़े भार प्रमाणित होंगे।
Essence
माता अपने सन्तानों के कल्याण के लिए तीन बातों से बचे-[क] गाली देने से, [ख] हिंसात्मक कर्मों से, [ग] औरों के आनन्द को नष्ट करने से। -
Subject
तीन त्याज्य बातें