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Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 1/26/1

35 Sukta
4 Mantra
1/26/1
Devata- देवा Rishi- ब्रह्मा Chhanda- गायत्री Suktam- सुख प्राप्ति सूक्त
Mantra with Swara
आ॒रे॑३ ऽसा॑व॒स्मद॑स्तु हे॒तिर्दे॑वासो असत्। आ॒रे अश्मा॒ यमस्य॑थ ॥

आ॒रे । अ॒सौ । अ॒स्मत् । अ॒स्तु । हे॒ति: । दे॒वा॒स॒: । अ॒स॒त् । आ॒रे । अश्मा॑ । यम् । अस्य॑थ॥

Mantra without Swara
आरे३ ऽसावस्मदस्तु हेतिर्देवासो असत्। आरे अश्मा यमस्यथ ॥

आरे । असौ । अस्मत् । अस्तु । हेति: । देवास: । असत् । आरे । अश्मा । यम् । अस्यथ॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. उल्का आदि का गिरना अथवा बिजली का गिरना ही 'देवों के वज्र का गिरना' कहलाता है। (असौ) = वह (हेति:) = वज्रपात (अस्मत्) = हमसे आरे (अस्तु) - दूर हो। बिजली आदि के गिरने के आधिदैविक प्रकोप से हम बचे रहें। २. हे (देवास:) = देवो! (यम्) = जिसे (अस्यथ) - आप फेंकते हो वह (अश्मा) = पत्थर आरे (असत्) = हमसे दूर रहें। ओलों के रूप में ये पत्थर पड़ते हैं और सम्पूर्ण पकी खेती की हानि हो जाती है। यह भी एक प्रबल आधिदैविक आपत्ति है। ३. देवों से प्रार्थना करते हैं कि ये आपत्तियाँ हमसे दूर ही रहें। वस्तुत: इन्हें दूर रखने का उपाय यही है कि हम भी 'देव' बनें। देव बनकर ही आधिदैविक कष्टों को दूर रक्खा जा सकता है। देव बनने का स्थूलभाव ('देवो दानाद्वा दीपनाद्वा द्योतनाद्वा') = इन शब्दों में सुव्यक्त है कि हम [क] देनेवाले बनें, [ख] ज्ञान की ज्योति से अपने को दीस करें, [ग] औरों के लिए ज्ञान-ज्योति देनेवाले हो।
Essence
देव बनकर हम बिजली गिरने व ओले आदि पड़ने के आधिदैविक कष्टों से बच सकते हैं।
Subject
बिजली गिरना व ओले पड़ना