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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 1/24/3

35 Sukta
4 Mantra
1/24/3
Devata- आसुरी वनस्पतिः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- श्वेत कुष्ठ नाशन सूक्त
Mantra with Swara
सरू॑पा॒ नाम॑ ते मा॒ता सरू॑पो॒ नाम॑ ते पि॒ता। स॑रूप॒कृत्त्वमो॑षधे॒ सा सरू॑पमि॒दं कृ॑धि ॥

सऽरू॑पा । नाम॑ । ते॒ । मा॒ता । सऽरू॑प: । नाम॑ । ते॒ । पि॒ता ।स॒रू॒प॒ऽकृत् । त्वम् । ओ॒ष॒धे॒ । सा । सऽरू॑पम् । इ॒दम् । कृ॒धि॒ ॥

Mantra without Swara
सरूपा नाम ते माता सरूपो नाम ते पिता। सरूपकृत्त्वमोषधे सा सरूपमिदं कृधि ॥

सऽरूपा । नाम । ते । माता । सऽरूप: । नाम । ते । पिता ।सरूपऽकृत् । त्वम् । ओषधे । सा । सऽरूपम् । इदम् । कृधि ॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. सब ओषधियों की माता यह पृथिवी है, हे आसुरी! (ते माता) = तेरी मातृस्थानापन्न यह पृथिवी (सरूपा नाम) = सरूपा नामवाली है। मिट्टी का लेप भी त्वग्दोष को दूर करके स्वरूपता लाने में सहायक होता है। २. इसीप्रकार सब ओषधियों का पिता धुलोक है। यह वृष्टि व सूर्य किरणों द्वारा इन ओषधियों को जन्म देनेवाला व पालन करनेवाला है। वह (ते पिता) = तेरा धुलोकरूपी यह पिता भी (सरूपः नाम) = सरूप नामवाला है। यह भी त्वचा को सरूपता देनेवाला है। सूर्य-किरणों को त्वचा पर लेना तथा वृष्टिजलों में स्नान-ये दोनों ही बातें त्वग्दोष को दूर करनेवाली हैं। ३. हे (ओषधे) = त्वचा के दोष का दहन करनेवाली आसुरि! (त्वम्) = तू भी इस पृथिवी व धुलोकरूप माता-पिता से उत्पन्न होकर (सरूपकृत्) = सारी त्वचा को समान रूपवाला करनेवाली है। (सा) = वह तू (इदं सरूपं कृधि) = हमारे इस शरीर को सरूप बना दे।
Essence
[क] मिट्टी का लेप, [ख] सूर्य-किरणों का सम्पर्क, [ग] वृष्टिजल में स्नान तथा [घ] आसुरी ओषधि का प्रयोग-ये चार बातें अवश्य कुष्ठ रोग को दूर कर सरूपता प्रास कराती हैं।
Subject
आसुरी के माता व पिता