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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 1/24/2

35 Sukta
4 Mantra
1/24/2
Devata- आसुरी वनस्पतिः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- श्वेत कुष्ठ नाशन सूक्त
Mantra with Swara
आ॑सु॒री च॑क्रे प्रथ॒मेदं कि॑लासभेष॒जमि॒दं कि॑लास॒नाश॑नम्। अनी॑नशत्कि॒लासं॒ सरू॑पामकर॒त्त्वच॑म् ॥

आ॒सुरी । च॒क्रे॒ । प्र॒थ॒मा । इ॒दम् । कि॒ला॒स॒ऽभे॒ष॒जम् । इ॒दम् । कि॒ला॒स॒ऽनाश॑नम् । अनी॑नशत् । कि॒लास॑म् । सऽरू॑पाम् । अ॒क॒र॒त् । त्वच॑म् ॥

Mantra without Swara
आसुरी चक्रे प्रथमेदं किलासभेषजमिदं किलासनाशनम्। अनीनशत्किलासं सरूपामकरत्त्वचम् ॥

आसुरी । चक्रे । प्रथमा । इदम् । किलासऽभेषजम् । इदम् । किलासऽनाशनम् । अनीनशत् । किलासम् । सऽरूपाम् । अकरत् । त्वचम् ॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (प्रथमा) = अत्यन्त फैलनेवाली (आसुरी) = इस आसुरी औषधि ने (इदम्) = इस किलास (भेषजम्) = श्वेतकुष्ठ के धब्बों की औषध को चक्रे बनाया है। (इदम्) = यह औषध किलास (नाशनम्) = श्वेतकुष्ठ का नाश करनेवाला है। २. नाश करनेवाला क्या, इसने तो (किलासम्) = किलास को (अनीनशत्) = नष्ट कर ही दिया और (त्वचं सरूपाम् अकरत्) = सारी त्वचा को समान रूपवाला कर दिया है। ३. यहाँ मन्त्र का उत्तरार्ध साहित्य की अतिशयोक्ति अलंकारपूर्ण शैली में कहा गया है। इससे ओषधि के महत्व पर प्रकाश पड़ता है। यह ओषधि किलास को शीघ्र दूर करनेवाली है, यही भाव अभिप्रेत है।
Essence
आसुरी ओषधि से बनाया गया भेषज किलास को शीघ्र दूर करनेवाला है।
Subject
त्वचा की सरूपता