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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 1/16/3

35 Sukta
4 Mantra
1/16/3
Devata- वरुणः Rishi- चातनः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- शत्रुबाधन सूक्त
Mantra with Swara
इ॒दं विष्क॑न्धं सहत इ॒दं बा॑धते अ॒त्त्रिणः॑। अ॒नेन॒ विश्वा॑ ससहे॒ या जा॒तानि॑ पिशा॒च्याः ॥

इ॒दम् । विऽस्क॑न्धम् । स॒ह॒ते॒ । इ॒दम् । बा॒ध॒ते॒ । अ॒त्त्रिण॑: । अ॒नेन॑ । विश्वा॑ । स॒स॒हे॒ । या । जा॒तानि॑ । पि॒शा॒च्या: ॥

Mantra without Swara
इदं विष्कन्धं सहत इदं बाधते अत्त्रिणः। अनेन विश्वा ससहे या जातानि पिशाच्याः ॥

इदम् । विऽस्कन्धम् । सहते । इदम् । बाधते । अत्त्रिण: । अनेन । विश्वा । ससहे । या । जातानि । पिशाच्या: ॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. गतमन्त्र के अनुसार राजा की ओर से लाइसेंस के द्वारा प्राप्त हुई (इदम्) = यह गोली (विष्कन्धम्) = [विष्कम्भम्] मार्ग में रोककर लूटनेवाले [Highway robbers] परिपन्थियों को (सहते) = पराभूत करती है। (इदम्) = यह (अत्रिण:) = औरों को खा-जानेवाले दैत्यों को (बाधते) = पीड़ित करती है और (अनेन) = इस गोली से उन (विश्वा) = सबका (ससहे) = पराभव करता हूँ (य:) = जोकि (पिशाच्याः जातानि) = पिशाची के सन्तान है, अर्थात् अत्यन्त पिशाचवृत्ति के हैं। औरों का मांस खानेवाले पिशाच हैं जिनकी यह वृत्ति है, उन्हें समाप्त करना ही ठीक हैं। २. चोर आदिकों के खतरे से युक्त स्थान में रहनेवालों को राजा बन्दुक आदि रखने की स्वीकृति दे देता है और वे उसका प्रयोग विष्कन्धों, अत्रियों व पिशाचों के नाश में ही करते हैं।
Essence
सीसे की गोली से मार्गप्रतिरोधक [डाकू], चोर व पिशाचों का संहार करना अभीष्ट है।
Subject
विष्कन्ध व अत्रि का मर्षण