Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 1/11/4

35 Sukta
6 Mantra
1/11/4
Devata- पूषादयो मन्त्रोक्ताः Rishi- अथर्वा Chhanda- पथ्यापङ्क्तिः Suktam- नारीसुखप्रसूति सूक्त
Mantra with Swara
नेव॑ मां॒से न पीव॑सि॒ नेव॑ म॒ज्जस्वाह॑तम्। अवै॑तु॒ पृश्नि॒ शेव॑लं॒ शुने॑ ज॒राय्वत्त॒वेऽव॑ ज॒रायु॑ पद्यताम् ॥

नऽइ॑व । मां॒से । न । पीब॑सि । नऽइ॑व । म॒ज्जऽसु॑ । आऽह॑तम् । अव॑ । ए॒तु॒ । पृश्नि॑ । शेव॑लम् । शुने॑ । ज॒रायु॑ । अत्त॑वे । अव॑ । ज॒रायु॑ । प॒द्य॒ता॒म् ॥

Mantra without Swara
नेव मांसे न पीवसि नेव मज्जस्वाहतम्। अवैतु पृश्नि शेवलं शुने जराय्वत्तवेऽव जरायु पद्यताम् ॥

नऽइव । मांसे । न । पीबसि । नऽइव । मज्जऽसु । आऽहतम् । अव । एतु । पृश्नि । शेवलम् । शुने । जरायु । अत्तवे । अव । जरायु । पद्यताम् ॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. (न इव मांसे) = न तो मांस में, (न पीवसि) = न ही चरबी में, (न इव मज्जसु) = और न ही मज्जा [marrow of the bones] में यह सन्तान किसी प्रकार से (आहतम्) = आहत हो। यह (पृश्नि:) = छोटे-से परिमाण का [Dwarfish] कोमल [Delicate], (शेवलम्) = [शी+वल] सोये-सोये गति करनेवाला गर्भस्थ सन्तान (अव एतु) = बाहर आ जाए। २. उसके शरीर का (जरायु) = आवृत करनेवाला जेर (शुने अत्तवे) =  कुत्ते के खाने के लिए हो। अथवा यह जरायु-जेर अवपद्यताम्-पूर्णरूप से बाहर तो आ ही जाए। अन्दर रह गया इसका अंश माता के ज्वर आदि का कारण हो जाता है। ३. यहाँ गर्भस्थ बालक को (पृश्नि) = छोटा-सा कहा गया है। वह सोये-सोये ही शरीर के अन्दर के व्यापार कर रहा होता है, अत: 'शे-बल' है। यह गर्भस्थ बालक का सुन्दरतम चित्रण है। यह मांस, चर्बी व मज्जा आदि सब धातुओं में किसी भी प्रकार से हिसित न हो। इसकी सब धातुएँ ठीक हों। आवरणभूत जरायु इसका ठीक रक्षण करे और सन्तान के बाहर आ जाने पर इस जरायु को कुत्ते आदि के लिए फेंक दिया जाए। जरायु का अंश अन्दर न रह जाए।
Essence
गर्भस्थ बालक की सब धातुएँ ठीक हों। वह जरायु से सुरक्षित हुआ बाहर आ जाए और पूर्ण स्वस्थ हो। जरायु के ठीक बाहर आ जाने से माता भी पूर्ण स्वस्थ हो।
Subject
पृश्नि-शेवलम् [छोटा-सा, सोये-सोये गति करनेवाला]